बारिश : It’s Raining

आज दिल बहुत सुकून में है
देखकर बाहर बारिश हो रही है।
मन मे उठते तूफान आज शांत से है
देखकर बाहर बारिश हो रही है।
मन मे आज तितलियाँ कुछ कम लहरा रही है
देखकर बाहर बारिश हो रही है।
दिमाग की बिजलियां आज कुछ कम कड़क रही है
देखकर बाहर बारिश हो रही है।
कानो में बादलों की गरज बंद सी है
देखकर आज बाहर बारिश हो रही है।
मन आज भीग कर तृप्त हो गया
क्योंकि आज बाहर बारिश हो रही है।

 

Today my heart is in peace
Because outside its raining.
Today thunderstorms in my mind are silent
Because outside its raining.
Today I don’t have butterflies in my stomach
Because outside its raining.
Today lightening isn’t striking in my brain
Because outside its raining.
Today sky howling isn’t in more decibels
Because outside its raining.
Today my heart has attain a great peace
Because outside its raining.

~Jyoti Yadav

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8 thoughts on “बारिश : It’s Raining

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      1. Ji….sukriya……bichaar likhne ke bahut aur sochne ke bhi bahut ho sakte hain…..phir bhi hamne thodi si likhne ka prayaas kiya shayad aapko pasand aaye……phir aap bataaye ….aapne kyun likh…….?……jo bhi ho ek aur kavita kaa janm aapke soch se ho gayaa…prastut hai…….

        ​सावन आता साल में जैसे वैसे प्रियतम आते,
        सावन रहता एक माह वे एक प्रहर में जाते,
        आज चहकती चिड़ियों जैसी,
        दरवाजे को खोल खड़ी,
        खिड़की,पर्दों के संग मौसम,
        प्रेम में मेरे झूम उठी,
        आजा प्रियतम देर हो रही,
        जाने का पल निश्चित है,
        सजी हुई फुलवारी तेरी,
        क़दमों में आ है अर्पित,
        बिरह साल का मिलन प्रहर का,
        कितनी ख्वाब संजोती,
        एक-एक पल प्रहर बनाती,
        मिलन हमारी होती,
        पंखुड़ियों सी खिली,महकती,
        इत्र में सेज भिगोती,
        पानी के बुलबुलों के जैसे,
        मिलन हमारी होती,
        फिर जलती मैं दीपक जैसे,छोड़ मुझे वे जाते,
        सावन रहता एक माह वे एक प्रहर में जाते,

        कल तक बारिश मुझे जलाती,
        मगर आज मन हर्षित है,
        मन ब्याकुल चंचल तितली सी,
        शांत आज मन पुलकित है,
        बाहर बारिश गर्म हवा,
        कानों में शोर मचाती,
        बिजली कड़के, मेघा बरसे,
        मुझे होश ना आती,
        तन भीगा,मन शांत झमाझम,
        सावन झड़ी लगाई,
        छूट गयी गाडी जाने की,
        बारिश आग लगाई,
        चार प्रहर के बाद है गाडी,
        प्रियतम संग हमारे,
        देख के जलती जिस बारिश को,
        उसको आज निहारे,
        ऐ सावन तू बड़ी दयालु,आज अगर ना आते,
        तू रहता है एक माह वे एक प्रहर में जाते।

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