अनदेखा ख्वाब

कैसे करूँ गुस्ताखी

आपसे नज़रे मिलाने की

कैसे करूँ शरारतें

आपका आँचल छुड़ाने की

पूरी कायनात बिखर पड़ेगी मुझ पर

जो ये गुस्ताखी हमसे हो गई

रूठ जाएगा ये आसमान ओर ये जमीं

जो ये शरारतें हमसे हो गई

और किस हक़ से देखूं आपको

आपके दीदार में ऐ हुस्न-ऎ-बेपरवाह

कतार लंबी बड़ी है

मैं एक काफिर आवारा सा

और आप मेरे सामने

एक अनदेखा ख्वाब सा खड़ी है।
– Jyoti Yadav

-Topic Challenge- Sachin Sapovadia

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