मर गया किसान:: Farmer’s Sucide

India has been a country of land and agriculture. Majority of people in indian are connected to Cultivation. On one side development is going on, on another hand our farmers are ending their lives due to poverty, heavy loans, debt, health issues, mentle illness, no source of income.

This poem is dedicated to the express the pain and struggle which our farmers go through.

ना फसल उगे न धान खिले
ना बरसात हुई ना खेत पले
देश में गरीबी से मर रहा है किसान
कहने वाले आज भी कहते मेरा भारत महान।

भारत है खेतों का देश
सीधा सीधा इसका भेष
कभी महकता था ये ऐसे
जैसे हो इत्तर की पुड़िया
कभी कहलाता था 
हमारा भारत सोने की चिडिया।

खेतों में हरियाली यूँ लहराती थी
सूंदर गीत वो जैसे कोई गाती थी

सावन में जब बादल बरसता था
किसान ख़ुशी में झुमा करता था।

समय अब वो बदल गया है
किसान क़र्ज़ तले दब गया है

खेत खलिहान सब सुख गया है
कर किराया सब बढ़ गया है
बरसात ने आना छोड दिया है
महंगाई ने भी कमर को तोड दिया है
सुन्न बेबस और लाचार खड़ा है किसान
कहने वाले अब भी कहते मेरा भारत महान।

इमारते बन गई है सॅटॅलाइट उड़ रहे है
उद्योग फ़ैल रहा है रोज़गार पनप रहे है
नौकरियां मिल गयी है शहर बस रहा है
विकास हो रहा है अमीरी बढ़ रही है
इस दौड़ में बस पीछे छूट गया बेचारा किसान

कहने वाले अब भी कहते  मेरा भारत महान।
बेमौसम की बारिश ने फसल को उजाड़ दिया

बेटी की शादी को क़र्ज़ का जुगाड़ किया
ज़मीदारों के उधार ने घर को बिगाड़ दिया

जिम्दारियों से लड़ लड़ कर थक गया किसान
कैसे जियेगा इतने बोझ के साथ 
सोच कर डर गया किसान

दूर तक भी कोई आस न दिखी  तो मर गया किसान
कहने वाले अब भी कहते  मेरा भारत महान।

 - Jyoti Yadav
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