मेरी कलम

दरिया में  प्रतिबिम्ब सी , धुप में परछाई है मेरी कलम ,

ना कोई  पर्दा ना कोई घूँघट ओढ  के आई है मेरी कलम ।

जो कहती हूं वही सुनती है , जो सोचती हूं वही लिखती है ,

जो बोलूं वही करती है, जो रुक जाऊ तो डरती है ,

 मेरी सखी मेरी सहेली, मेरी परछायी है मेरी कलम ,

ना कोई  पर्दा ना कोई घूँघट ओढ  के आई है मेरी कलम ।

सहारा मेरी उदासी की, साथी मेरी ख्याति की,

दुनिया से जबसे  नज़रे  चुराई है , बस तू ही मेरे मन को भाई है,

कैद थे मेरे अरमान  जो दिल के, आज़ाद हुए सब  तुम से मिल के ,

मेरी हिम्मत मेरी ताकत, मेरी आज़ादी बन के आयी है मेरी कलम,

ना कोई  पर्दा ना कोई घूँघट ओढ  के आयी है मेरी कलम ।

ढूंढती  थी मैं अपना मकसद और अपनी पहचान,

खोज खोज के थक गई थी मैं नन्ही सी जान ,

ना कोई ठोर ना कोई ठिकाना, कहा जाऊ थी मैं परेशान,

तुम आयी फिर मेरे जीवन मे बन के एक वरदान ,

मेरी कलम को पाया जब से, वो बन गई मेरी शान,

मेरी साथी मेरी दुनिया, मेरी सहजादी बन के आयी है मेरी कलम ,

ना कोई  पर्दा ना कोई घूँघट ओढ  के आयी है मेरी कलम ।

पन्नों से जो इसने यारी की है,मुझसे भी दिलदारी की है,

मेरी,कलम और पन्नो की क्या खूब जमी, जबसे सांझेदारी की है,

कभी धीमे कदम बढाती है तो कभी इसने रफ्तारी की है,

मेरी दोस्ती मेरी यारी, मेरी कहानी बन के आयी है मेरी कलम,

ना कोई पर्दा ना कोई घूंघट ओढ़ के आयी है मेरी कलम ।


                                                                       ~  Jyoti Yadav

                                 Topic Credit    ~ Bhupender K Yadav 

                                Copyright ©Jyoti Yadav. All rights reserved.


  

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