कौन था वो..????

शाम के  अँधेरे सा,  बादलो की परछायी सा है वो ,

घटाओं की काली छाया सा, धुंधला सा एक चेहरा है वो ।

हलकी सी एक आहट  और बढ़ती दिल की धड़कन सा है वो ,

एहसास है कही उसके आने का,

क्या नाम है उसका? कहाँ से  आया है वो?

क्यों आया है वो ? क्या लेकर जायेगा वो ?

 

गहरी सी परछाई उसकी किसी अपने के होने का एहसास कराती  है ,

हलकी सी  आँखों की चमक उसकी दिल को छु  के जाती है ।

छुपी हुई होठों  की मुस्कान उसकी हवाओ में जादू सा ले आती आती है ,

देख मेरा दिवानगी को, लबो तले खामोशी  से मुस्कुराया है वो ।

क्या नाम है उसका? कहाँ से  आया है वो?

क्यों आया है वो ? क्या लेकर जायेगा वो ?

 

उसकी  अधूरी मुलाकात से ही जीवन के रंग बदल जाते है ,

कब सामने आएगा वो इस खवाहिश तले हम दबे जाते है ।

दीदार उसका अब तो  मेरा मकसद बन गया है ,

वक़्त भी अब तो उसकी हाज़री में ठहर गया है ,

इस इंतज़ार की इंतेहा को देकर कुछ इतराया है वो ।

कब आएगा वो ? कहाँ  से आएगा वो ?

क्यों आया है वो ? क्या लेकर जायेगा वो ?

 

अब तो इंतज़ार में रैना भी ढलने लगी  है ,

सुबह की सर्द हवाएं चलने लगी है ,

एक सर्द हवा के झोके न रात की खामोसी को जगाया,

नैन खुले और रैन ढले तो समझ आया,

एक ख्वाब था वो, सपनो की दुनिया से आया था वो ,

एक एहसास था वो जो दिल में बसने आया था वो ,

अज़नबी था कोई जो अपना बनने आया था वो ,

एक ख्वाब था, जो मुझको चुराने आया था वो  ।

                                                                            ~Jyoti Yadav

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